मास्‍को: भारत और रूस की तीनों सेनाओं ने संयुक्‍त रूप से इंद्रा 2026 सैन्‍य अभ्‍यास शुरू किया है। यह अभ्‍यास रूस के जापान से सटे फार ईस्‍ट इलाके में हो रहा है। इसमें सेना के जवान, युद्धपोत और एयर फोर्स के फाइटर जेट हिस्‍सा ले रहे हैं। इस सैन्‍य अभ्‍यास का मकसद दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्‍वय और ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाना है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी करके बताया कि इस अभ्‍यास को फार ईस्‍ट के चेलयबिंस्‍क इलाके में सेंट्रल म‍िल‍िट्री डिस्ट्रिक में मंगलवार को आयोजित किया गया। यह सैन्‍य अभ्‍यास अभी 23 अक्‍टूबर तक चलेगा।

इस अभ्‍यास के दौरान दोनों ही देशों की सेनाएं कमांड एंड कंट्रोल का अभ्‍यास करेंगी और अवैध हथियारबंद गुटों के खिलाफ संयुक्‍त रूप से हमला करने का अभ्‍यास करेंगी। रूसी सेना के दल में मुख्‍य रूप से 90वें गार्ड टैंक डिव‍िजन के सैनिक शामिल हैं। व्‍लादिवोस्‍तोक में दोनों देशों की नौसेनाओं ने उद्घाटन समारोह आयोजित किया। इसमें रूसी अल्‍दार युद्धपोत और भारतीय नौसेना के फ्रीगेट आईएनएस सहयाद्री ने हिस्‍सा लिया। भारतीय नौसेना का यह पोत कुछ दिन पहले ही रूस के इस प्रशांत महासागर स्थित पोर्ट तक पहुंच गया था।
भारत और रूस की नौसेनाएं करेंगी अभ्‍यास

भारत और रूस के सैन्‍य अधिकारियों ने कहा कि यह संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास एशिया और प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देगा। इस अभ्‍यास का नौसैनिक चरण आज से शुरू हो गया है। इस दौरान युद्धपोत रणनीतिक दांव का अभ्‍यास करेंगे। इस दौरान समुद्र में लाइव फायरिंग और हवाई लक्ष्‍यों को न‍िशाना बनाने पर फोकस किया जाएगा। इस दौरान दोनों देशों के नौसैनिक नकली आतंकियों द्वारा जब्‍त किए गए किसी जहाज को छुड़ाने का भी अभ्‍यास करेंगे।

इस नौसैनिक अभ्‍यास के दौरान ड्रोन और मानवरहित व‍िस्‍फोटकों से भरी नौकाओं के खिलाफ एक संयुक्‍त कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं हवाई अभ्‍यास के दौरान भारतीय वायुसेना और रूसी वायुसेना के सुखोई-30 फाइटर जेट निचली उड़ान भरने वाले लक्ष्‍यों को निशाना बनाएंगे। इसके अलावा युद्धपोतों को तबाह करने के लिए अभ्‍यास किया जाएगा। इसके लिए छोटे और मध्‍यम दूरी के एयरबॉर्न हथियारों का इस्‍तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा कम से मध्‍यम ऊंचाई पर हवा में लड़ने का अभ्‍यास किया जाएगा। इसी तरह से एमआई-8 हेलीकॉप्‍टर की मदद से खोज और बचाव का अभ्‍यास किया जाएगा।